सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं
अनुद्वेगकरं वाक्यं सत्यं प्रियहितं च यत् ।स्वाध्यायाभ्यसनं चैव वाङ्मयं तप उच्यते ॥भक्ति, ज्ञान व कर्मयोग के अद्वितीय संगम पवित्र ग्रंथ #श्रीमद्भागवत #गीता_जयंती की हार्दिक शुभकामनाएं।#GeetaJayanti #ktishnayadavbarnagar
इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें